jai Maa dhari devi

Jai Maa Dhari Devi, मंदिर का रहस्य और इतिहास जानें

इस पेज पर Jai Maa Dhari Devi मंदिर का रहस्य और इतिहास की जानकारी दी गई है। 

ताकि आप आद्य शक्ति माँ धारी देवी के बारें में जान सकें। क्योकिं माता रानी हर श्रदालु की मनोकामना पूरी करतीं है।

यदि कोई सच्चे मन से माँ की पूजा करता है तो उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।

माता रानी के दर्शन करने के लिए लोग दूरदराज से आते है यदि आप भी माता रानी के दर्शन करना चाहते है तो अवश्य माता रानी के दर्शन कर सकते है।

क्योकिं मैंने बचपन से माता रानी के दर्शन किये है आज भी में माता रानी के दर्शन करता हूँ माता रानी से जो भी मैंने सच्चे दिल से माँगा है वह हमेसा पूरा हुआ है।

माता रानी हमेसा दुखों को हरति है यदि आप भी सच्चे दिल से माता रानी को याद करेंगे तो आपकी भी मनोकामनायें पूर्ण होगी।

माता रानी के मंदिर में कैसे जायें :

यदि आप आद्य शक्ति माँ धारी देवी के दर्शन करना चाहते है। 

तो उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल राजमार्ग ( पौड़ी गढ़वाल ) से उन्नीस किलोमीटर दुरी पर कलियासौड़ गांव स्थित 500 मीटर नीचे अलकनंदा नदी के किनारे पर माँ धारी देवी का भव्य मंदिर स्थित है।

यदि आप माँ धारी देवी जाना चाहते है तो टाटा सोमो, बस या अपनी गाड़ी का उपयोग कर सकते है। 

धारी देवी मंदिर का रहस्य इतिहास :

माता रानी के बारे में एक स्थानीय लोगों के अनुसार माँ धारी देवी कालीमठ में भयंकर बाढ़ आने के कारन बाढ़ में बह कर आयी थी।

जब माता रानी बाढ़ में बह रही थी तो धारी गांव के कुछ लोगों को मूर्ति की पुकार सुनाई दी मुझे बचाओ मुझे बचाओ माता रानी की आवाज सुनकर धारी गांव के लोग नदी के किनारे आ गये। आ तो गए पर संगम रास्ता होने के कारन माता रानी तक नहीं पहुंच पा रहे थे।

फिर माता रानी से कहने लगे हे माता रानी हम आपको बाहर कैसे निकाले जहाँ पर आप है वहाँ पर तो बहुत कठिन रास्ता है हम कैसे आयें, माता रानी ने कहा जहाँ – जहाँ तुम्हारे पाँव पड़ेंगे वहाँ पर अपने आप रास्ता बनेगा।

ये सुनकर गांव के लोग माता रानी को नदी से बाहर निकाल लायें और मूर्ति को नदी के किनारे लगे चट्टान से सटे हुए स्थान पर विराजमान कर दिया।

आज भी मंदिर इसी जगह पर स्थित है। जिन्हे माँ धारी देवी के नाम से जाना जाता है। पुजारियों के अनुसार माता रानी की मूर्ति द्वापर युग से स्थापित है। 

माता रानी के दर्शन के लिए भक्त लोग बारह माह आते रहते है। बद्रीनाथ जाते वक्त श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करना भी नहीं भूलते।

पौड़ी जिलें में स्थितः कलियासौड़ गांव में माता रानी का केवल आधा शरीर स्थापित है और बाकि शरीर रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ में विराजमान है और माता रानी की मूर्ति को बंद छत के नीचे नहीं रखा जाता है।

पूजा अर्चना :

यदि आप माता रानी के दर्शन के लिए जाते है तो माता रानी की मूर्ति जहाँ पर विराजमान है उस जगह पर आसमान खुला मिलेगा।

हर साल नवरात्रों के अवसर पर माता रानी की विशेष पूजा की जाती है।

देवी काली के आशीर्वाद पाने के लिए दूर – नजदीक के लोग इस पवित्र मंदिर में दर्शन करने के लिए आते रहते हैं।

अधिक जानकारी के लिए आप माँ धारी देवी लिंक पर क्लिक करें।

Jai Maa Dhari Devi के दिन में तीन रूप :

इस मंदिर में माता रानी रोजाना तीन रूप बदलती है।

मां सुबह में कन्या, माँ दोपहर में युवती और माँ शाम को वृद्ध अवस्था का रूप धारण करती हैं। कहा जाता है की माता रानी उत्तराखंड के चार धाम की रक्षा करती है।

यह भी जानें :

यदि आप आद्य शक्ति माता रानी के दर्शन करने का मन बना रहे तो यह भी जान लें – माता रानी का मंदिर अलकनंदा नदी पर बने  330 मेगावाट जल विधुत परियोजना की झील में यह प्राचीन मंदिर डूब गया है।

माता रानी की प्रतिमा को 16 जून 2013 की शाम 6:30 के मध्य अपने निजी स्थान से दूसरे अस्थायी स्थल पर स्थापित कर दिया गया था।

Jai Maa Dhari Devi

 

उस दौरान कुछ लोगों का कहना है की प्रतिमा के हटाए जाने के कुछ घंटे के बाद उत्तराखंड में आपदा आई थी। जिससे पुराना मंदिर डूब गया और नया भव्य मंदिर का अभी काम चल रहा है।

लेकिन इसके बाबजूद भी भक्तों की आस्था माता रानी के प्रति कम नहीं हुई है।

रोजाना श्रदालु माता रानी के दर्शन करने के लिए आते रहते है। 

माँ धारी देवी मंदिर में पूजा – अर्चना कौन करता है ?

अध्य शक्ति माँ धारी देवी दरबार में भक्त जनों की पूजा पंडित परिवार के पांडेय लोग करते है। यहाँ पर पूजा पाठ प्रत्येक जनों की मन्त्र उच्चारण के साथ किया जाता है।

माता रानी के प्रसाद में क्या लें ? 

माता रानी के चढ़ावे में नारियल, धुप, प्रसाद ,पिटाई, अगरबत्ती, पंचमेवा, कपूर, फल फ्रूट इत्यादि।

श्रृंगार के समान में सीसा, कंगी, काजल, बिन्दी ,छोटी-बड़ी चुन्नी, माता रानी के वस्त्र और अपने शरदा के अनुसार माता रानी को घंटी, चाँदी के छत्तर चढ़ा सकते है।

 

ये सभी सामान माता रानी के स्थल में उपलब्ध मिलेगा या आप बाहर से भी ला सकते है।

मंदिर खुलने का समय :

प्रातः काल 6 बजे से संध्याकाल 8 बजे तक माता रानी का मंदिर खुला रहता है।

इन्हे भी पढ़ें :

अंतिम शब्द :

आशा करता हूँ की आपको Jai Maa Dhari Devi  के बारें में जानकारी सही लगी होगी। 

यदि सही लगे तो इस पोस्ट को अपने परिवार में शेयर जरूर करें।

जिससे माँ धारी देवी के दर्शन के लिए अधिक से अधिक श्रदालू पहुँचे । माता रानी आपकी इच्छा और मनोकामना पूर्ण करें, भक्तों को माता रानी की कृपा से अवगत करायें।

धन्यवाद

अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कमेंट बॉक्स में “जय माँ धारी देवी ” अवश्य लिखें।

admin

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम शिव है और Help Guide India ब्लॉग पर आपका स्वागत है यहाँ पर आपको Employee Help, Study, Internet, Technical, Computer नॉलेज से सम्बन्धित सभी जानकारी हिंदी भाषा मिलेंगी, Help Guide India वेबसाइट का एक ही मकसद है आपकी मदत करने में आपकी मदत करता है इसलिए इस Hindi Blog से जुड़े रहने के लिए हमें फेसबुक व् इंस्टाग्राम में फॉलो करें ।

One thought on “Jai Maa Dhari Devi, मंदिर का रहस्य और इतिहास जानें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to top