माँ धारी देवी मंदिर का रहस्य और इतिहास

इस आर्टिकल पर आज आप  माँ धारी देवी मंदिर का रहस्य और इतिहास के बारें में पढ़ेंगे। इस आर्टिकल को पूरा अंत तक पढ़ें। जिससे माता रानी के रहस्य और इतिहास के बारे जान सकें। 

माता रानी के मंदिर में कैसे जायें

 

 

यदि आप आद्य शक्ति माँ धारी देवी के दर्शन करना चाहते है तो उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल राजमार्ग ( पौड़ी गढ़वाल ) से उन्नीस किलोमीटर दुरी पर कलियासौड़ गांव स्थित नीचे 500 मीटर अलकनंदा नदी के किनारे पर माँ धारी देवी का भव्य मंदिर स्थित है। माँ धारी देवी जाने के लिए आप टाटा सोमो, बस या अपनी गाड़ी का प्रयोग कर सकते है। 

धारी देवी का रहस्य इतिहास

आद्य शक्ति माँ के बारे में एक स्थानीय लोगों के अनुसार माँ धारी देवी कालीमठ में भयंकर बाढ़ आने के कारन बाढ़ में बह कर आयी थी। जब माँ धारी देवी बह रही थी तो धारी गांव के लोगों को मूर्ति की पुकार सुनाई दिया मुझे निकालें और प्रतिष्ठित स्थान पर विराजमान करें।

तब से गांव के लोगों ने माता रानी की मूर्ति को नदी के किनारे लगे चट्टान से सटे हुए स्थान पर विराजमान कर दिया। आज भी मंदिर इसी जगह पर स्थित है। जिन्हे माँ धारी देवी के नाम से जाना जाता है। पुजारियों के अनुसार माता रानी की मूर्ति द्वापर युग से स्थापित है। 

माता रानी के दर्शन के लिए भक्त लोग बारह माह आते रहते है। बद्रीनाथ जाते वक्त श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करना भी नहीं भूलते। पौड़ी जिलें में स्थितः कलियासौड़ गांव में माता रानी का केवल आधा शरीर स्थापित है और बाकि शरीर रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ में विराजमान है और माता रानी की मूर्ति को बंद छत के नीचे नहीं रखा जाता है।

यदि आप माता रानी के दर्शन के लिए जाते है तो माता रानी की मूर्ति जहाँ पर विराजमान है उस जगह पर आसमान खुला मिलेगा। हर साल नवरात्रों के अवसर पर माता रानी की विशेष पूजा की जाती है। देवी काली के आशीर्वाद पाने के लिए दूर – नजदीक के लोग इस पवित्र मंदिर में दर्शन करने के लिए आते रहे हैं।

अधिक जानकारी के लिए आप माँ धारी देवी लिंक पर क्लिक करें।

माता रानी के दिन में तीन रूप 

इस मंदिर में माता रानी रोजाना तीन रूप बदलती है। मां सुबह में कन्या, माँ दोपहर में युवती और माँ शाम को वृद्ध अवस्था का रूप धारण करती हैं। कहा जाता है की माता रानी उत्तराखंड के चार धाम की रक्षा करती है।

यह भी जानें 

यदि आप आद्य शक्ति माता रानी के दर्शन करने का मन बना रहे तो यह भी जान लें – माता रानी का मंदिर अलकनंदा नदी पर बने  330 मेगावाट जल विधुत परियोजना की झील में यह प्राचीन मंदिर डूब गया है। माता रानी की प्रतिमा को 16 जून 2013 की शाम 6:30 के मध्य अपने निजी स्थान से दूसरे अस्थायी स्थल पर स्थापित कर दिया गया था।

जय माँ धारी देवी

 

उस दौरान कुछ लोगों का कहना है की प्रतिमा के हटाए जाने के कुछ घंटे के बाद उत्तराखंड में आपदा आई थी। जिससे पुराना मंदिर डूब गया और नया भव्य मंदिर का अभी काम चल रहा है। लेकिन इसके बाबजूद भी भक्तों की आस्था माता रानी के प्रति कम नहीं हुई है। रोजाना सर्दालु माता रानी के दर्शन करने के लिए आते रहते है। 

माता रानी के प्रसाद में क्या लें 

माता रानी के चढ़ावे में नारियल, धुप, अगरबत्ती, पिटाई, कपूर, श्रृंगार का सामान, फल फ्रूट माता रानी की छोटी- बड़ी चुन्नी, अपने शरदा के अनुसार माता रानी को घंटी,चाँदी के छत्तर छोटी या बड़ी चढ़ा सकते है।

 

जय माँ धारी देवी

ये सभी सामान माता रानी के स्थल में उपलब्ध मिलेगा या आप बाहर से भी ला सकते है।

मंदिर खुलने का समय 

प्रातः काल 6 बजे से संध्याकाल 8 बजे तक माता रानी का मंदिर खुला रहता है।

अंतिम शब्द 

आशा करता हूँ की आपको माँ धारी देवी के बारें में जानकर सही लगा होगा।यदि यह पोस्ट सही लगे तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें जिससे आद्य शक्ति माँ धारी देवी के दर्शन के लिए अधिक से अधिक भक्त पहुँचे ।

माता रानी आपकी इच्छा और मनोकामना पूर्ण करें,भक्तों को माता रानी की कृपा से अवगत करायें।

धन्यवाद

अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए कमेंट बॉक्स में “जय माँ धारी देवी ” अवश्य लिखें।

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