दशहरा

दशहरा पर निबंध हिंदी में पढ़ें और सीखें

दशहरा:

दशहरा हिंदुओं का त्यौहार जिसे अश्विनी शुक्ल पक्ष की दशमी में मनाया जाता है जिसे विजयदशमी या दशहरा नाम से जानते है। इस त्यौहार को हिंदू बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

ये त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाता है, यानी पाप पर पुण्य की जीत लोग इसे कई सारे रीति-रिवाज और पूजा-पाठ के द्वारा मनाते है।

धार्मिक लोग और भक्त गढ़ पूरे दिन व्रत रखते है। कुछ लोग इसमें पहले और आखिरी दिन व्रत रखते है तो कुछ देवी दुर्गा का आशीर्वाद और मनोकामना पूरी के लिये पूरे नौ दिन तक व्रत रखते है। दसवें दिन लोग राजा रावण पर राम की जीत परदशहरा मनाते है।

दशहरा का अर्थ एवं कहानियाँ :

दशहरा शब्द जिसका अर्थ है दस बुराइयों से छुटकारा पाना अर्थात अच्छाई की बुराई पर जीत है।  दशहरा की सबसे प्रचलित कहानी है भगवान राम का युद्ध में विजय होना व रावण की बुराई का अंत करना।

श्री राम अयोध्या नगरी के राजकुमार थे और उनकी पत्नी का नाम सीता था और उनके छोटे भाई का नाम लक्ष्मण और राजा दशरथ राम के पिता थे। उनकी पत्नी कैकई के द्वारा मांगे गए वरदान के कारन श्री राम को अयोध्या छोड़कर चौदह वर्ष के लिए वनवास जाना पड़ा, उसी वनवास के दौरान रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया।

राजा रावण बड़ा शक्तिशाली एवं उसके पास सोने की लंका थी, लेकिन उसमे बहुत अहंकार एवं एक शिव भक्त भी था।

रावण के पिता विशर्वा एक ब्राह्मण थे एवं माता राक्षस कुल की थी, इसलिए रावण में एक ब्राह्मण के समान ज्ञान था और एक राक्षस के समान शक्ति और इन्ही दो बातों के कारन रावण में अहंकार हो गया था।

जिसे ख़त्म करने के लिए भगवान विष्णु ने राम अवतार लिया राम ने अपनी सीता को वापस लाने के लिए रावण से युद्ध किया, जिसमे वानर सेना और हनुमान जी ने राम का साथ दिया।

इस युद्ध में रावण के छोटे भाई विभीषण ने भी भगवान राम का साथ दिया और अन्त में भगवान राम ने रावण को मार कर उसके घमंड का नाश किया।

आज के समय में दशहरा ?

आज के समय में दशहरा इन पौराणिक कथाओं के अनुसार मनाया जाता हैं।

माता के नौ दिन की समाप्ति के बाद दसवें दिन जश्न के तौर पर मनाया जाता हैं।  जिसमे कई जगहों पर राम लीला की जाती  है।

जिसमे कलाकार रामायण के पात्र बनते हैं और राम-रावण के इस युद्ध को नाटकीय रूप में देखते है।

दशहरा का मेला :

कई जगहों पर इस दिन मेला लगता है, जिसमें कई दुकानें और खाने पीने का आयोजन होता हैं।  उन्हीं आयोजनों में नाट्य नाटिका का प्रस्तुतिकरण भी किया जाता हैं।

इस दिन घरों में लोग अपने वाहनों को साफ़ करके उसका पूजन करते हैं।

व्यापारी अपने लेखा का पूजन करते है। किसान अपने जानवरों और फसलो का पूजन करते हैं।  इंजिनियर अपने औजारों और अपनी मशीनों का पूजन करते हैं। इस दिन घर के सभी सदस्य दशहरे मैदान पर जाते हैं, वहाँ रावण, कुंभकरण और रावण के पुत्र मेघनाथ के पुतले का दहन किया जाता है।

सभी देशवासियों के साथ इस जीत का जश्न मनाते हैं और मेले का आनंद लेते हैं। अगर एक पंक्ति में कहे तो यह त्यौहार आपसी रिश्तो को मजबूत करने और भाईचारा बढ़ाने के लिए होता हैं, जिसमे मनुष्य अपने मन में भरे घृणा को साफ़ करके एक दूसरे से त्यौहार में मिलते है।

यह पर्व हमें एकता की शक्ति प्रदान करता है।

 दशहरा में पूजा पाठ :

भारत में कही स्थानों में दस दिन पहले इस त्यौहार की तैयारी शुरू हो जाती है।

स्त्रियां और पुरुष सभी सुंदर वस्त्रों से सुसज्जित होकर तुरही, बिगुल, ढोल, नगाड़े, बाँसुरी आदि जिसके पास जो बाजा होता है, उसे लेकर बाहर निकलते हैं।

इस त्योहार के दौरान शहर में छोटे मोटे दुकाने मिठाईयों से भरे रहते हैं। सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी के दिन सुबह और शाम को दुर्गा पूजा की जाती है।

दशहरा नौ दिनों तक चलता है जिसमें तीन देवियां लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की पूजा की जाती है । पहले तीन दिन लक्ष्मी – धन और समृद्धि की देवी की पूजा की जाती है। अगले तीन दिन सरस्वती- कला और विद्या की देवी की  पूजा की जाती है और अंतिम दिन देवी दुर्गा-शक्ति की देवी की स्तुति की जाती है। पूजा के स्थान को अच्छी तरह फूलों और दीयो से सजाया जाता है।

महत्व :

दशहरा हिन्दूओ का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। त्यौहार का महत्व इसके धार्मिक मूल्य में है।

यह हमें बुराई पर अच्छाई की जीत सिखाता है। यह रावण पर राम की जीत के सम्मान में पूरे देश में मनाया जाता है।

यह आम तौर पर अक्टूबर के महीने में आता है। देश के विभिन्न हिस्सों में दशहरा त्योहार विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।

निष्कर्ष :

रामायण के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि देवी दुर्गा को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये राजा राम ने चंडी का पाठ करवाया  था। इसके अनुसार युद्ध के दसवें दिन रावण को मार कर उस पर विजय प्राप्त कर लिया था।

दशहरा को दुर्गोत्सव भी कहा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उसी दसवें दिन माता दुर्गा ने भी महिषासुर का वध किया था।

पुरे भारत वर्ष में रामलीला मैदान में एक बहुत बड़ा मेला आयोजित किया जाता है जहाँ दूसरे क्षेत्र के लोग इस मेले के साथ ही रामलीला का नाट्य मंचन देखने आते है। इस दिन पकवान आदि सबके घरों में बनाये जाते है। विजय दसमी के तौर पर एक दूसरे को मिठाई खिलाते है।

यह प्रेरणा मिलती है कभी बुरे काम नहीं करने चाहिए।

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अंतिम शब्द :

आशा करता हूँ की आपको दशहरा पर निबन्ध कैसे लिखते है जानकारी सही लगी होगी।

यदि सही लगे तो अपने स्कूली बच्चों में शेयर जरूर करें।

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