Lotus Temple कहाँ पर है, महत्वपूर्ण जानकारी एवं कलाकृति और कैसे जायें

Lotus

इस पेज द्वारा आज आप Lotus Temple ( कमल मन्दिर ) से जुड़ी उन सभी बातों से परिचित होंगे जो आपके समुद्र रूपी ज्ञान को भी प्रजलित करने में सहायक होगा और कमल मन्दिर को आप और अच्छे से जान सकेंगे।

Lotus Temple कहाँ पर है ?

कमल मन्दिर भारत देश के दिल्ली राज्य में स्थापित है अगर आप देखेंगे तो दुनियाँ के अन्य देशों के मंदिर या भारत जैसे धार्मिक देश के अन्य मंदिरों की तुलना में भारत का यह कमल मन्दिर अलग है क्योंकि इसकी रूप रेखा और बनावट किसी भी मंदिर से मेल नहीं खाती चाहे वह बनावटी हो या फिर मंदिर में स्थापित की गई मूर्ती हो यह सबसे अलग है।

कमल मन्दिर की ऐतिहासिक जानकारी :

लॉटस टेम्पल का निर्माण 1986 में पूर्ण हुआ।

कमल मन्दिर जो भारतीय उपमहाद्वीप में यह कमल मन्दिर मदर टेंपल के नाम से भी प्रसिद्ध है कमल मन्दिर को निम्न प्रकार के आर्टटेक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

और आप पायेंगे की कमल मन्दिर पर बहुत सी पत्रिकाओं में लेख भी उपस्थित है और यह मन्दिर किसी भी जाति धर्म को नहीं प्रदर्शित करता है यहां किसी भी धर्म के व्यक्ति प्रार्थना के लिए प्रवेश कर सकता है।

लॉटस टेम्पल की कलाकृति :

इस कमल मन्दिर को 27 मार्वल की पंखड़ियों से बनाया गया है।

जिनका आकार कमल की पत्तियों की भाती बना हुई है जो 3 तथा 9 पखड़ियो में विभाजित किया गया है कमल मन्दिर में प्रवेश करने के लिए 9 प्रवेश द्वार का निर्माण किया गया जो 40 मीटर बड़े है इसमें ज्यादा से ज्यादा एक साथ 2400 लोग प्रवेश कर सकते हैं। और दुनिया में सबसे ज्यादा लोग इसे देखने आते हैं।

इस मन्दिर का निर्माण करने में लगभग एक दशक से ज्यादा अवधी का समय लगा और 24 दिसम्बर 1986 में इस कमल मन्दिर का द्वार सभी आम आदमी के लिए खोल दिया गया था। कमल मन्दिर को बनाने में लगभग 700 इंजिनियर तथा टेक्नीशियन ने मिल कर इसको कमल का आकार दिया। कमल मन्दिर की लम्बाई 40 मीटर है और यह पानी के 9 तालाबों से घिरा हुआ है। जिनके मध्य में कमल मन्दिर स्थंभित हैं।

कमल मन्दिर को बनाने में किस देश से सामग्री प्राप्त की गई :

यूनान यूरोप उपमहाद्वीप में स्थित एक देश ग्रीस से प्राप्त की गई है। ग्रीस देश के मार्बल पत्थर का इस्तेमाल किया गया है जो मार्बल पत्थर दूर से दिखने में दर्पण की भांति प्रतीत होते हैं। अगर कमल मंदिर के रंग की बात करें तो यह सफेद रंग का है।

कमल मंदिर के मुख्य  चित्रकार :

कमल मन्दिर को कनाडा के चित्रकार फेरिबोर्ज सहब ने चित्रित किया है।

उन्होंने इस मन्दिर में पर्यटक का आकर्षण बढ़ाने के लिए मन्दिर के आस-पास घास के बने बगीचों में खूबसूरत कलाकारी का प्रदर्शन किया है। यह मन्दिर दूर से दिखने में कमल की भांति प्रतीत होता है।

जो इसका आकर्षण केंद्र है।

कमल मन्दिर किस धर्म से है ?

कमल मन्दिर बहाई धर्म से संबंधित है जिस धर्म के द्वारा 7 मन्दिरों का निर्माण कराया गया जो ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, पनामा के पनामा शहर , पश्चिमी समुआ के एपिय, युगांडा के कंपाला और जर्मनी के फेंग फूट यूएसए के विल मैट मे है।

जिनमे से कमल मन्दिर एक है पंरतु बहाई धर्म के लोगों का मानना था की धर्म अलग -अलग होते है पंरतु सभी धर्मो के भगवान एक है यही कारण है की अन्य सभी धर्मो के लोग इस मन्दिर का उपयोग कर अपने भगवान के प्रति प्रार्थना करने के लिए आते हैं।

लोटस टेम्पल में लगभग हर एक घंटे में 5 मिनट के लिए प्रार्थना का अयोजन किया जाता है, तथा कमल मन्दिर में किसी भी प्रकार की वस्तु को ले जाना वर्जित है कमल मन्दिर में 9 से 10 हजार लोग रोज़ाना आते हैं।

कमल मन्दिर के नौ द्वार :

Lotus Temple में प्रवेश करने के लिए 9 द्वार बनाए गए जिनको बनाने में एक अपना अलग ही उद्देश्य था भाई उल्लाह का मानना था दुनिया में जितने धर्म है उन सभी 9 धर्मो को ध्यान में रखते हुए प्रवेश द्वार बनाए जाएं जिससे इस मन्दिर में घूमने आए हुऐ किसी भी धर्म के पर्यटक इस  स्थल को एकता का प्रतिक समझें।

कमल मन्दिर की सुन्दरता :

हालांकि कमल मन्दिर की सुंदरता किसी की तारीफ की मोहुताज नही है परन्तु इसमें चार चांद लगाने के लिए उसके तालाबों में लगी लाइट उसे रात्री के समय बहुत ही अध्भुत और सुन्दर बनाती है जिसको देखने के बाद मन प्रसन्न हो जाता है।

कमल मन्दिर जाने के लिए उपयोगी वाहन :

आप कमल मन्दिर जाने के लिए दो प्रकार के पसंदीदा वाहन का उपयोग कर सकते हैं सार्वजनिक तथा निजी वाहन और इनके रास्ते भी अलग है।

सार्वजनिक वाहन :

सार्वजनिक वाहन में जैसे बस,मेट्रो आदीका इस्तेमाल। कमल मन्दिर जाने के लिए अगर आप मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं तो आपको सबसे पहले कालका मंदिर मेट्रो स्टेशन का उपयोग कर वहा पहुंचना है जिसके 150 मीटर की दूरी पर कमल मन्दिर का प्रवेश द्वार है जहा से कमल मन्दिर को देखने आने वाले पर्यटक प्रवेश करते हैं।

निजी वाहन :

निजी वाहन जैसे कार, मोटर साईकिल आदी जैसे वाहन  का उपयोग सिर्फ कमल मन्दिर जाने के लिए रोड का उपयोग होता है जो आप सिर्फ डिजिटल मीडिया द्वारा  लाइव लोकेशन का उपयोग कर पहुंच सकते हैं।

सारांश :

इस पेज के द्वारा दी गई सभी जानकारी जिनका शायद आपको पहले से ज्ञान नहीं था जैसे बहाई धर्म और बहाई धर्म के द्वारा निर्माण किए गए सभी सातों मंदिर की स्थापना कहा की गई हैं इन बातो का पता चलता है।

किस प्रकार रात के समय मन्दिर की खूबसूरती बढ़ जाती है।

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अंतिम शब्द :

आशा करता हूँ की आपको Lotus Temple की सभी जानकारी सही लगी होगी।

सही लगे तो दोस्तों को शेयर जरूर करें।

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