गाय

गाय पर निबंध हिंदी में, पढ़ें और सीखें

गाय का परिचय :

आप जानते ही होंगे हमारे शास्त्रों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है।

गाय को पूजनीय माना जाता है। इसलिए भारतीय घरों में घर की पहली रोटी गौ माता यानि गाय को दी जाती है। ऐसा भी कहा जाता है कि गायों की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी और गाय को स्वर्ग में स्थान मिला था।

हमारे पुराणों में भी गायों की महिमा का वर्णन किया गया है। पुराण में लिखा है कि माता कामधेनु सागर मंथन से प्रकट हुई थी।

कामधेनु को सुरभि की संज्ञा दी गयी थी। कामधेनु को ब्रह्म देव जी अपने लोक ले गये और लोक कल्याण के लिए ऋषि-मुनियों को सौंप दिया।

गाय किसे कहते है ?

गाय एक पालतू पशु है। जिसके नर प्रजाति को बैल तथा मादा प्रजाति को गाय कहते है।

अगर गाय की शारीरिक संरचना की बात करें तो एक मुंह, दो आंखें, चार थन, दो सिंह, दो नथुने तथा चार पैर होते हैं।

गाय की पूंछ लंबी होती है और किनारे पर एक बाल का गुच्छा होता है जिससे वह मक्खियां उड़ाने के लिए प्रयोग करती है। गाय दूध देती है। जिसके दूध को मनुष्य और अन्य पालतू जानवरों के लिए बेहतर माना जाता है।

हमारे द्वारा उपयोग में ली जाने वाली ज्यादातर खाद्य पदार्थ दूध पर निर्भर होते हैं। भारत के अलग-अलग स्थानों पर गायों की अलग-अलग प्रजातियाँ देखने को मिलता है।

उदाहरण: जर्सी गाये यह ज्यादा दूध देने के लिए प्रसिद्ध है लेकिन यह विदेशी प्रजाति मानी जाती है।

गाय की प्रजाति :

ये तो आप जानते ही है गाये अलग – अलग रंग-रूप और आकार की होती है। उसका कद छोटा भी होता है, तो लम्बा भी,  इसकी पीठ चौड़ी होती है। जैसे हमारे देश में विभिन्न प्रकार की जलवायु होती है, उसी प्रकार पशु भी अलग-अलग जगहों पर अलग – अलग किस्म के पाए जाते हैं। भारत में40 या 50 से भी ज्यादा नस्लों की गाय पाई जाती हैं जिन्हें उनके दूध देने की क्षमता से पहचान सकते है।

1) साहीवाल :

यह भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रजाति है, नाम तो सुना होगा यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में पाई जाती है।

यह सालाना 2000-3000 लीटर तक दूध देती है।

2) गिर :

यह मूल रूप से भारत के गुजरात के गिर के जंगलों में पाई जाती हैं। इसी कारण इसका नाम गिर पड़ा है। यह भारत की सबसे दुधारू गाय है।

यह एक  दिन के 40  -80 लीटर दूध देती है। इसकी इस खासियत के कारण विदेशों में भी इसकी बहुत माँग रहती है। इजराइल और ब्राजील में इसे पाला जाता है।

3) लाल सिंधी :

लाल रंग के कारण इसका नाम लाल सिंधी पड़ा है। ये कर्नाटक और तमिलनाडू में पाई जाने लगी है। यह भी सालाना २०००-३०००  लीटर दूध देती है।

4) राठी नस्ल, कांकरेज, थारपारकर :

यह राजस्थान में पाई जाती है। इसका नाम राठस जनजाति के नाम से ही पड़ा है। यह एक दिन में ६-८ लीटर तक दूध देती है। कांकरेज प्रजाति राजस्थान के बाड़मेर और जालौर में अधिक देखने को मिलती है। वहीं थारपारकर जोधपुर में अधिक दिखती है।

5) दज्जाल और धोनी प्रजाति :

यह प्रजातियां पंजाब में पाई जाती हैं। यह बहुत फुर्तीली मानी जाती है। धोनी प्रजाति ज्यादा दूध नहीं देती है किन्तु दज्जाल देते हैं।

6) मेवाती, हासी-हिसार :

यह हरियाणा की प्रमुख नस्लें हैं। मेवाती का उपयोग कृषि कार्य में किया जाता है। जबकि हांसी-हिसार हरियाणा के हिसार में मिलती हैं।

गाय को पालने के फायदे :

गाय पालने से बहुत सारें फायदें है जिसके बारें में हम नीचें स्टेप वाईस पढ़ेंगे –

  •  गाये के दूध में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम और मिनरल होते हैं जो पोषण के लिए बहुत जरूरी होते हैं।

  • गाये के दूध से दही, छाछ, पनीर जैसे बहुत से खाद्य पदार्थ बनते हैं जिनमें भरपूर मात्रा में विटामिन और प्रोटीन होता हैं।

  • दूध और पनीर यह भारत में सबसे ज्यादा प्रयोग की जाने वाली खाद्य पदार्थ है जो गाय तथा भैंस के दूध से ही बनाए जाते हैं।

  • अन्य दूध देने वाले पशुओं की तुलना में गाय का दूध बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है खास कर बच्चों को गाय का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है।

  • दुनिया के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा दूध से जुड़ा हुआ है। ये तो आप जानते ही हो, जिसमें गाय का दूध से पसंद किया जाता है। आज भी गाय के ऑर्गेनिक दूध की मांग बहुत ज़्यादा है।

  • गाये के गोबर से बेहतर खाद बनाए जाते हैं। ऐसे खाद को बनाने में खर्च नहीं होता और कभी खराब भी नहीं होता।

  • गाय जीवित रहने पर मनुष्य के लिए जरूरी चीजें प्रदान करती हैं वही मरने के बाद वह अपने चमड़े तथा हड्डियों के माध्यम से मनुष्य के जीवन को सरल बनाती है।

  • Cow के गोबर को सुखाकर ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है जिससे हवा में रहे बैक्टीरिया का नाश होता है।

भारत में गाय का महत्व:

ऐसा कहा जाता है कि आजादी से पहले हर भारतीय परिवार के पास एक गाये होती थी।

ऐसी मान्यता है कि जिसके घर में गाय होती है उस घर में भुखमरी नहीं आती।

गाय की इतनी सारी खूबियों के कारण ही इसे देवता का दर्जा दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि गाये के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है इसलिए गोवर्धन पूजा के दिन गायों की पूजा की जाती है जिसमें मोर पंखों से उसका श्रृंगार किया जाता है।

गाय को पालने के लिए ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि गाय सिर्फ हरे और सूखे चारे पर निर्भर रहती है।

प्राचीन समय में जिस देश में जितनी गाय होती थी उसको उतना ही संपन्न माना जाता था। यही कारण है की कृष्णा ने अपनी ज्यादातर लीलाएँ एक ग्वाले के रूप में की हैं। इसलिए उनका एक नाम गोपाल भी है।

उपसंहार:

गाय शांतिप्रिय जानवर है हमारे भारत में इसको माँ का दर्जा इसलिए दिया जाता है,

क्योंकि यह हमें जीवन भर कुछ ना कुछ देती रहती है और हम अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए गाये का दूध पीते हैं। डॉक्टर मरीजों को गाय का दूध पीने की सलाह देते हैं।

गाये का दूध नवजात शिशुओं के लिए अच्छा व आसानी से पच जाने वाला खाना है। यह स्वभाव से बहुत सीधा पशु होता है।

हमें इसके जीवन से कुछ सीखना चाहिए और हमेशा अपने जीवन को शांतिपूर्ण जीना चाहिए और दूसरे लोगों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

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अंतिम शब्द :

उम्मीद करता हूँ की आपको गाय पर निबंध हिंदी में कैसे लिखें जानकारी सही लगी होगी।

यदि सही लगे तो अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें।

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