महात्मा गाँधी

महात्मा गांधी पर निबन्ध, परिचय, आंदोलन एवं विरोध

आज मैं इस पेज में महात्मा गांधी जी के बारे में एवं महात्मा गाँधी पर निबन्ध कैसे लिखें जानकारी शेयर करने जा रहा हूँ ।

जिससे आपको महात्मा गांधी के बारें में जानकारी मिल सकें।

इसलिए आप हमारे दिए हुए पेज को पूरा पढ़ें –

इससे पहले हमने कंप्यूटर पर निबंध कैसे लिखे बताया था आप इस को जरूर पढ़ें।

 महात्मा गाँधी जी का परिचय :

गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 गुजरात के पोरबंदर मैं हुआ था । इनका पूरा नाम मोहन दास करमचंद गाँधी था और इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था। 1888 में गांधीजी ने वकील की पढ़ाई लंदन में की। गांधीजी विदेश मैं दो वर्ष तक रहे और जनवरी 1915 में भारत वापस आ गए।

वहाँ वे एक वकील के रूप में गए थे और बाद में वे उस क्षेत्र में भारतीय समुदाय के नेता बन गए। दक्षिण अफ्रीका ने ही गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी।

स्वदेशी आंदोलन 1905-1907 :

कुछ प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक महाराष्ट्र विपिन चंद्रपाल बंगाल लाला लाजपत रॉय पंजाब लाल बाल और पाल के नाम से भी इस आंदोलन को जाना जाता है ।

अंग्रेजों का विद्रोह करने का तरीका  :

लाल, बाल,पाल इन लोगों ने अंग्रेजी शासक के प्रति लड़ाकू विद्रोह का समर्थन किया गोपाल कृष्ण गोखले,मोहम्मद अली जिन्ना वही कुछ उदारवादी समूह जो लगातार प्रयास करते रहने का हिमायती थे।

महात्मा गांधी जी के गुरु :

महात्मा गांधी के राजनीतिक गोपाल कृष्ण गोखले थे। इन्होंने गांधी जी को 1 वर्ष तक ब्रिटिश भारत यात्रा करने की सलाह दी। जिससे की वह इस भूमि और यहाँ के लोगों के बारे में जान सके यहाँ के लोगों के समस्याओं का समाधान कर सके‌‌।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय उद्घाटन समारोह :

फरवरी 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित व्यक्तियों में राजा और मानव प्रेमी थे।

जिसके द्वारा दिए गये दान से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में योगदान दिया। समारोह में एनी बेसेट जैसे कॉन्ग्रेस के कुछ महत्वपूर्ण नेता भी उपस्थित थे ।

जब महात्मा गाँधी जी के बोलने की बारी आई तो उन्होंने मजदूर और गरीबों की और ध्यान न देने के कारण उन्होंने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना भले ही शानदार है किंतु उन्होंने वही धनी और अमीर लोगों को देखकर गरीब लोगों के लिए चिंता प्रकट कि‌ उन्होंने कहा कि भारत के लिए मुक्ति तब तक संभव नहीं है।

जब तक आप अपने आप को इन अलंकरणो से मुक्त न ले, उन्होंने कहा कि हमारे लिए स्व शासन का तब तक कोई अभिप्राय नहीं है।

किसानों से उनके श्रम का लगभग सम्पूर्ण लाभ स्वयं तथा अन्य लोगों को ले लेने की अनुमति देता रहेगा। हमारी मुक्ति केवल किसानों के माध्यम से ही हो सकते हैं न की वकील,डॉक्टर न जमींदार इसे सुरक्षित रख सकते हैं।

महात्मा गाँधी जी ने स्वयं को बधाई देने के सुर में सुर मिलाने की अपेक्षा लोगों की उन किसानों और कामगारों की याद दिलाना चुना जो भारतीय जनसंख्या में अधिसंख्य हिस्से के निर्माण करने के बावजूद वहां श्रोताओं मैं अनुपस्थित थे।

1917 में आंदोलन :

1917 का वर्ष चंपारण में गांधीजी का किसानों को अपनी पसंद की फसल उगाने के लिए आजादी दिलाने में बीता।

1918 में आंदोलन :

1918 मैं महात्मा गाँधी जी गुजरात मैं दो अभियान में संलग्न रहे‌।

पहला अहमदाबाद के कपड़े की मीलो में काम करने वालों के लिए काम करने की बेहतर स्थिति की मांग की।

दूसरा खेड़ा मैं फसल चौपट होने पर राज्य से किसानों का लगान माफ करने की मांग की।

असहयोग आंदोलन की शुरुआत :

गाँधी जी के द्वारा अहमदाबाद के चम्पारण और खेड़ा में गाँधी जी एक नायक के रूप में उभरे जिनमे आम जनता के लिए सहानुभूति थी,

1914-18 के महान युद्ध के दौरान अंग्रेजों ने प्रेस प्रतिदिन लगा दिया और बिना जांच करवाएं कारावास की अनुमति दे दी।

अब सर सिडनी रालेट की अध्यक्षता वाली एक समिति की संस्तुतियों के आधार पर इन कठोर उपाय को जारी रखा गया उत्तरी और पश्चिमी भारत मैं चारों तरफ बंद का समर्थन किया। स्कूल और दुकानों के बंद होने के कारण जीवन ठहर सा गया। गांधीजी ने रौलट एक्ट 1919 के खिलाफ पूरे देश में अभियान चलाया।

पंजाब में विरोध :

पंजाब में अधिकतर भारी मात्रा में विरोध हुआ। माना जाता है की पंजाब के लोगो ने अंग्रेजों के साथ काम किया था, ये लोग काम के बदले अंग्रेजो से इनाम की गुंजाइस कर रहे थे लेकिन अंग्रेजों ने इन्ही ईनाम सी जगह रौलट एक्ट दे दिया। पंजाब जाते समय गांधी जी को कैद कर दिया गया। स्थानीय कांग्रेस नेता को भी गिरफ्तार किया गया ‌‌।

स्थिति धीरे धीरे तनावपूर्ण हो गई। अप्रैल 1919 में अमृतसर मैं खून खराबा अपने चरम पर पहुंच गया। यहां एक अंग्रेज ब्रिगेडियर ने एक राष्ट्रवादी सभा पर गोली चलाने का हुक्म दिया।

इस जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) मैं 400 से अधिक लोग मारे गए। रोलेट सत्याग्रह से ही गांधी जी एक सच्चे नेता बने गए। उसके बाद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग अभियान की मांग कर दी।

भारतीयों से आग्रह किया गया कि स्कूल, कॉलेज और न्यायालय मैं न जाएं  तथा कर न चुकाए। गांधीजी ने कहा अगर असहयोग का सही तरह से पालन हुआ तो 1 साल में भारत स्वराज प्राप्त कर लेगा।

अपने संघर्ष का विस्तार करते हुए गांधी जी के खिलाफत आंदोलन के साथ हाथ मिला लिया। गांधीजी को यह उम्मीद थी कि असहयोग आंदोलन और हिंदू मुस्लिम एकता इससे अंग्रेजी शासक का अंत हो जाएगा 1921 में 396 हड़ताल कोई हुई जिसमें 600000 मजदूर शामिल थे।

चौरी चौरा :

5 फरवरी 1922 में किसानो के समूह ने पुलिस स्टेशन पर आक्रमण करके आग लगा दी।

इस अग्निकांड मैं कई पुलिसवालों की जान चली गई, हिंसा कि इस कार्यवाही से गांधीजी को यहआंदोलन वापस लेना पड़ा ।

असहयोग आंदोलन के दौरान हजारों भारतीयों को जेल में डाल दिया गया। गांधी जी को भी मार्च 1922 में डाल राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया।

जन नेता के रूप में गांधीजी :

गांधी जी ने आंदोलन में आम जनता को भी शामिल किया। अब आंदोलन में केवल अमीर लोग नहीं बल्कि आंदोलन में आम लोगों की भी हिस्सेदारी थी जैसे किसान श्रमिक तथा अन्य कारीगर।

1922 तक महात्मा गाँधी जी ने भारतीय राष्ट्रवाद को बिल्कुल बदल कर रख दिया। 1916 मैं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय मैं जो उन्होंने भाषण दिया था उस भाषण में किए गए वादे को उन्होंने पूरा किया।

यह आंदोलन सिर्फ बड़े लोगो के लिए नहीं था बल्कि महात्मा गाँधी जी ने आम जनता को भी इसमें शामिल किया। बहुत सारें श्रमिक एवं कारीगर यहाँ भाग लेने लगे जिससे महात्मा गाँधी को एक अच्छे नजरों से देखे जाने लगा।

सामान्य जन के साथ इस तरह की पहचान उनके वस्त्रों में विशेष रूप से देखी जा सकती थी। जहां अन्य नेता पश्चिमी शैली के सूट तथा औपचारिक वस्त्र पहनते थे। वही गांधीजी एक धोती पहना करते थे।

गांधीजी जहां भी गए वही उनकी चामत्कारिक शक्तियों की अफवाह फैल गई। कुछ स्थानों गांधीजी को गांधी बाबा महात्मा गांधी कहकर पुकारा जाने लगा तथा गांधी महाराज जैसे शब्द भी उनके लिए प्रयोग किए जाते थे।

गांधीजी हमेशा से ही गरीब किसानों के साथ खड़े रहे तथा गांधीजी गरीब किसानों के हमदर्द तथा मसीहा के रूप में देखा जाने लगा। गांधी जी ने आंदोलन का प्रचार – प्रसार मातृ भाषा में किया।

महात्मा गांधी जी ने हिंदू मुस्लिम एकता पर बल देने का प्रयास किया जिसने आंदोलन का स्वरूप बदलने लगा। रजवाड़ों को समझने हेतु प्रजामंडल का गठन किया गया। गांधीजी के आदर्श आकर्षण व्यक्तिगत के कारण बड़े-बड़े नेता उनसे आकर जुड़ने लगे। गांधी जी ने चरखे का प्रचार प्रसार किया।

 महात्मा गाँधी जी और चमत्कारिक शक्तियों:

अफवाहों कुछ स्थानों पर यह कहां गया की उन्हें राजा के द्वारा किसानों के दुख तकलीफों में सुधार के लिए भेजा गया उनके पास सभी स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों को अस्वीकृत करने की शक्ति हैं।

गांधीजी की शक्ति अंग्रेज बादशाह से अधिक है उनके आने से औपनिवेशिक शासक जिसने भाग जाएंगे।गांधीजी की आलोचना करने वाले गांव के लोगों के  घर रहस्यात्मक रूप से गिराए और उनके फसल चौपट हो गई।

कांग्रेस की कई नई शाखाएं खोली गई। राजवाड़ा मैं राष्ट्रवादी सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए प्रजामंडल की श्रंखला स्थापित की जा रही थी महात्मा गांधी ने राष्ट्रवादी संदेश अंग्रेजी भाषा की जगह मातृभाषा में रखने के लिए उत्साहित प्रोत्साहित किया गांधीजी के प्रशंसको मैं गरीब किसान और धनी उद्योगपति दोनों ही थे।

1917 से 1922 के बीच भारतीयों के बहुत ही प्रतिभाशाली वर्ग मैं स्वयं को गांधीजी से जोड़ लिया इनमें महादेव देसाई ,बल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, अब्दुल कलाम,जवाहरलाल नेहरु, गोविंद बल्लभ पंत, सी राजगोपालाचारी, सरोजिनी नायडू आदि शामिल थे। महात्मा गांधी को 1924 से जेल से रिहा कर दिया गया‌ ।

अब उन्होंने अपना ध्यान घर में बने कपड़ों के बढ़ावा देने तथा छुआछूत समाप्त करने पर लगाया। गांधीजी केवल राजनीतिक नेता नहीं बल्कि एक समाजसेवी और समाज सुधारक भी थे। उनका मानना था कि भारतीय को बाल विवाह और आज छूट जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त करना होगा ।

आज सहयोग आंदोलन समाप्त होने के कई वर्ष बाद तक महात्मा गांधी ने अपने समाज सुधार के कार्य पर केंद्रित रखा मैं उन्होंने पुनः राजनीति में प्रवेश करने की सोची।

साइमन कमीशन :

1919मैं भारत सरकार अधिनियम लाया गया। इसे मोटेक्यू चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से भी जाना जाता है। इससे यह कहा गया है कि 10 वर्ष बाद इन सुधारों की जांच की जाएगी भारतीय जनता और कांग्रेस भी इसकी मांग कर रहे थे। क्योंकि भारतीय इस सुधार से संतुष्ट नहीं थे।

साइमन कमीशन का विद्रोह :

साइमन कमीशन का गठन 1927 साइमन कमीशन भारत आया 1928 साइमन आयोग का अध्यक्ष जान साइमन साइमन था। सभी इसमें 7 सदस्य थे। सभी सदस्य अंग्रेज थे। इसका भारतीयों ने विद्रोह किया।

विद्रोह-  मुंबई तथा कलकत्ता में हुआ था साइमन वापस जाओ सुभाष चंद्र ने कोलकाता में विद्रोह किया।

लखनऊ में – जवाहरलाल नेहरू जी, जी. बी पंत ने विद्रोह किया ।

लाहौर – भगत सिंह नेतृत्व- लाला लाजपत राय पुलिस ने लाल लाजपत राय पर लाठी से हमला किया जिससे उनकी मृत्यु हो गई। मुस्लिम लिंग ने जीना के नेतृत्व में साइमन कमीशन का विद्रोह किया।

1929 मैं कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन हुआ। जवाहरलाल नेहरू को अध्यक्ष चुना गया। पूर्ण स्वराज की घोषणा की। 26 जनवरी 1930 को अलग-अलग स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशभक्ति के गीत गाकर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया ।

नमक सत्याग्रह / डांडी :

स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने के बाद तुरंत भारत बाद में गांधी जी ने घोषणा की ब्रिटिशो द्वारा बनाए गए कानून जिसमें नमक के उत्पादन और विक्रय पर राज्य को एकाधिकार दे दिया ।

गांधीजी का मानना था कि हर घर में नमक का प्रयोग अपरिहार्य था और अंग्रेज ऊंचे दामों मैं खरीदने के लिए लोगों को बाध्य कर रहे थे।

इस को निशाना बनाते हुए गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ निर्णय लिया और यह आंदोलन 12 मार्च 1930 से 6 मार्च 1930 तक चला। इसमें 79 अनुयायियों के साथ पैदल निकले थे गांधी जी ‌।

गांधी जी की मृत्यु 

गांधी जी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला भवन में नाथूराम गोडसे ने गांधीजी के सीने पर तीन गोलियां मारी थी, जिससे राष्ट्रपिता की तत्काल मौत हो गयी थी।

इन्हे भी पढ़ें :

अंतिम शब्द :

आशा करता हूँ की आपको महात्मा गाँधी पर निबन्ध कैसे लिखे जानकारी सही लगी होगी।

यदि सही लगे तो अपने दोस्तों में जरूर शेयर करें।

कोई प्रश्न है हमें कमेंट करें।

admin

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम शिव है और Help Guide India ब्लॉग पर आपका स्वागत है यहाँ पर आपको Employee Help, Study, Internet, Technical, Computer नॉलेज से सम्बन्धित सभी जानकारी हिंदी भाषा मिलेंगी, Help Guide India वेबसाइट का एक ही मकसद है आपकी मदत करने में आपकी मदत करता है इसलिए इस Hindi Blog से जुड़े रहने के लिए हमें फेसबुक व् इंस्टाग्राम में फॉलो करें ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to top